निषेचन के बाद अंडे से फल में परिवर्तित होता है अर्थात परिपक्व अंडाशय को फल कहा जाता है। फूलों के पौधों में निषेचन के बाद, अंडाशय में कई परिवर्तन होते हैं। और अंत में बीजांड और अंडाशय से क्रमशः बीज और फल बनते हैं। के कार्य में कई परिवर्तन होते हैं। कुछ वृद्धि नियामक पदार्थों हार्मोन के प्रभाव के कारण सुबह की शुरुआत के बाद अंडाशय।
महुआ के पत्ते को बस्तर में पत्तल, दोनी बनाते हैं जो कि बर्तन का काम करता है उससे हम खाना सब्जी पका हुआ रख सकते है जिसे हम यानी बस्तर के लोग शादी विवाह या अन्य त्योहरों में उपयोग करते हैं बर्तन के रूप में उपयोग करते हैं हमने देखा है कि मंदिरों में पात्र के रूप में आशा की थाली का उपयोग करते हैं उसी प्रकार बस्तर में पत्ते के बने फल और धोनी का प्रयोग करते हैं जो कि पवित्र पात्र के रूप में होता है महुआ के पत्ते को बस्तर में गिलास के रूप में प्रयोग करते हैं जिसे चिपड़ी कहते हैं यानी जब हम गिलास का प्रयोग करते हैं उस जगह चिपड़े का उपयोग कर सकते हैं पानी पीने और अन्य चीज पीने के लिए
संज्ञा का अर्थ- संज्ञा का शाब्दिक अर्थ है-सम्+ज्ञा अर्थात् सम्यक् ज्ञान कराने वाला। इस प्रकार संज्ञा कि परिभाषा है-किसी भी वस्तु, व्यक्ति,गुण ,भाव स्थिति का परिचय कराने वाला शब्द।इसका दूसरा पर्याय है- नाम। अतः किसी भी व्यक्ति वस्तु, स्थिति या गुण के नाम को संज्ञा कहते हैं।
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